मुफलिसी

अब न मुस्कराओ अब न मुस्कुराओ
गरीब कि रोटी मे भी अब तन्दुरी का जुगाड़ करने वालों
अब न मुस्कुराओ गरीब को गरीब बनाने वालों
इनके चिरागो न मिल सका सही तेल यारो
अपने घर को बारात सा सजाने वालों
अब न मुस्कुराओ गरीब को गरीब बनाने वालों
एक गरीब को न मिल सकीं दो वक्त कि रोटी यारों
अपने उत्सव मे खाना फेकने वालों
अब न मुस्कुराओ गरीब को गरीब बनाने वालों 
भूख गरीबी वेरोजगारी खत्म होने का वादा देने वालों
अब इन्हीं वादों पर पांच साल बिताने वालों 
अब न मुस्कुराओ गरीब को गरीब बनाने वले 

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